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लायबिलिटी इन्शुरन्स

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आज के माहौल में कवरेज की ज़रूरत सबसे प्रमुख है, और सच्चाई यह है कि हम एक अनिश्चित आर्थिक वातावरण में रहते हैं और किसी को कुछ पता नहीं होता कब वित्तीय सहायता की ज़रूरत पड़ जाए। इन्शुरन्स एक सुरक्षा कवच का काम करि है और ग्राहक को आ सकने वाली कई समस्याओं से बचाती है। कवरेज प्लान विभिन्नप्रकार के होते हैं जोपूरी तरह से ज़रूरत पर निर्भर करते हैं। सबसे ज़्यादा ली जाने वाली पॉलिसियों में एक्सिस्टेंस कवरेज पॉलिसी और मेडिकल इन्शुरन्स होती है।

लेकिन कुछ ऐसी पॉलिसियां भी हैं जो खुद में अनोखी हैं और केवल कुछ विशेष ज़रूरतों के लिए ही होती हैं। इस प्रकार की पॉलिसियां वे ग्राहक लेते हैं जिन्हें अपनी किसी ख़ास समस्याओं के लिए कवर चाहिए होता है ना की पारंपरिक कवर जैसे कि लाइफ या हेल्थ इन्शुरन्स। ऐसी पॉलिसियों में से एक है लायबिलिटी इन्शुरन्स।

लायबिलिटी इन्शुरन्स एक ऐसी पॉलिसी है जो उन व्यापारों और व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करती है जिन्हें क़ानून के शिकंजे में फंसने का या लापरवाही या गलत आचरण या चोट के लिए मुक़दमे में फंसने का ख़तरा होता है। यह कवरेज पॉलिसी इन्शुरन्स किए व्यक्ति को जेल के खर्चों और जिन खर्चों के लिए पॉलिसीधारक की देनदारी पाई जाती है उनसे बचाती है। लेकिन अनुबंधीय ज़िम्मेदारियाँ और जान बूझ कर लिए गए नुकसान इस कवरेज पालिसी के हिस्से के रूप में शामिल नहीं होते।

इस इ की शुरुआत उन एजेंसियों और लोगों द्वारा की गई थी जिन्होंने असामान्य जोखिमों को अनुभव किया और जिन दूसरे लोगों ने ऐसी परेशानी देखि थी उनकी सहायता के लिए एक कोष बनाया। ये पॉलिसियां उनके क्लेम के लिए कवर प्रदान करती हैं क्योंकि इन्शुरन्स किया गया व्यक्ति किए गए नुकसान की खुद भरपाई करने में असमर्थ होता है। अगर कोई क्लेम किया जाता है तो पॉलिसी प्रदाता पॉलिसीधारक को कवर करेगा।

लायबिलिटी इन्शुरन्स की आवश्यकता क्यों है?

इस प्रकार की पॉलिसियां वे समूह या व्यक्ति लेते हैं जो चोट या अन्य मामलों की वजह से क़ानूनी रूप से ज़िम्मेदार ठहराए जा सकते हैं। यह खासकर अस्पतालों, डॉक्टरों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के मालिकों पर लागू होता है। उदाहरण के लिए अगर कोई उत्पाद निर्माता ऐसा उत्पाद बेचता है जो खराब निकलता है या दूसरे के सामान को नुकसान पहुंचाता है तो, नुकसान की भरपाई के लिए उस पर  मुक़दमा किया जा सकता है। लायबिलिटी कवरेज खरीदने से यह निर्माता आने वाले क़ानूनी खर्चों के लिए कवर प्राप्त कर लेगा।

लायबिलिटी कवरेज जनरल इन्शुरन्स की रिस्क ट्रांस्फरेन्स श्रेणी का ही एक हिस्सा है। कई देशों में लायबिलिटी कवरेज अनिवार्य है खासकर सार्वजनिक डिलीवरी वाहनों के चालकों के लिए। भारत में इस कवरेज के कार्यक्षेत्र का वर्णन 1991 के जनरल पब्लिक लायबिलिटी इन्शुरन्स एक्ट के अंतर्गत किया गया है।

किसी व्यापार के लिए लायबिलिटी इन्शुरन्स अनिवार्य कैसे है?

चाहे छोटा हो, माध्यम या बड़ा हो, हर प्रतिष्ठान को लायबिलिटी इन्शुरन्स लेने के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि इसे लेने से मुक़दमा होने के जोखिम से सुरक्षा मिलती है और आपके ब्रांड की साख दांव पर नहीं लगती। यह पालिसी उन थर्ड पार्टी लायबिलिटी को कवर करती है जो व्यापार संचालन, परिसरों और उत्पादों की विभिन्न  श्रेणियों से निकल कर आती हैं। इसके साथ ही, लायबिलिटी इन्शुरन्स उस स्थिति के जोखिम को भी कवर करती है जब संगठन का कोई कर्मचारी संगठन का काम करते हुए घायल हो जाता है।

लायबिलिटी इन्शुरन्स कैसे कवरेज और सहायता प्रदान कर सकती है?

लायबिलिटी इन्शुरन्स किसी भी व्यापारिक प्रतिष्ठान द्वारा चुनी जाने वाली पहली चीज़ होती है क्योंकि:

  • यह क़ानूनी ज़िम्मेदारियाँ आने पर संगठन को बचाती है और साथ ही कंपनी की ओर से क्लेम को भी संभालती है।
  • जब कंपनी अपना व्यापार दूसरे देशों में फैलाती है तो यह कवरेज को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी विस्तार देती है।
  • यह ग्लोबल मास्टर प्रोग्राम भी प्रदान करती है।

कवरेज की व्यापकता क्या है?

लायबिलिटी इन्शुरन्स की कवरेज की सीमा इन्शुरन्स करने वाले और करवाने वाले के बीच इन्शुरन्स के दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करते समय तय होती है। अलग अलग संगठनों के लिए कवरेज की सीमा अलग अलग हो सकती है। आमतौर पर इसमें ये सब शामिल होता है:

  • संपत्ति को क्षति और शारीरिक चोट 
  • निजी और विज्ञापन की चोट 
  • मेडिकल बिल 
  • परिसर और संचालन की लायबिलिटी 
  • उत्पाद और संचालन की लायबिलिटी 
  • सीमित अनुबंधीय लायबिलिटी 
  • पूरक भुगतान

क्या कवर नहीं होता?

आपका लायबिलिटी प्लान क्या कवर करता है यह आपके राज्य के मूलभूत क़ानून पर निर्भर करता है। एक राज्य की अदालत किसी चीज़ को लायबिलिटी प्लान में शामिल मान सकती है जबकि पडोसी राज्य की अदालत उसे लायबिलिटी कवर में शामिल नहीं मान सकती। कुछ इस प्रकार की घटनाएं हैं जिनकी इन्शुरन्स नहीं होती और जो हर तरह के इन्शुरन्स प्लान में घटना की श्रेणी से बाहर रखी जाती हैं:

  • कर्मचारी को लगने वाली चोट 
  • वाहन की लायबिलिटी 
  • व्यापारिक संपत्ति को क्षति 
  • प्रदूषण 
  • उत्पाद - संपूर्ण कवरेज सीमाएं समझना 

सिंगल अक्करैंस लिमिट - यह वह सीमा है जिसमें इन्शुरन्स कंपनी केवल एक घटना के लिए भुगतान करेगी।

एग्रीगेट लिमिट - यह वह सबसे बड़ी राशि है जिसका भुगतान इन्शुरन्स कंपनी प्लान की अवधि में सभी घटनाओं के लिए करेगी। आमतौर पर यह राशि सिंगल अक्करैंस लिमिट की दो गुणा होती है।

अपवाद

  • शराब से संबंधित लायबिलिटी 
  • कर्मचारियों का आचरण 
  • श्रमिकों के लाभ 

लायबिलिटी इन्शुरन्स क्लेम प्रक्रिया

मूल रूप से, जब लायबिलिटी इन्शुरन्स की बात आती है तो आपको पता होगा कि इसकी प्रक्रिया हर इन्शुरन्स कंपनी के लिए अलग होती है। इसके लिए आपको एक मौलिक फॉर्म ज़रूरी दस्तावों के साथ समयपूर्वक जमा करवाना होता है। लायबिलिटी इन्शुरन्स क्लेम के मामलों में इन्हें फाइल करना उतना आसान नहीं होता क्योंकि इसमें अदालत के केस और अदालत के बाहर हुए समझौते शामिल होते हैं। क्लेम किस कारण के लिए किया जा रहा है उसके आधार पर क्लेम की प्रक्रिया अलग होती है।

ये कंपनियां लिएबिलिर्टी इन्शुरन्स प्रदान करती हैं

भारत में कई कंपनियां हैं जो अलग अलग प्रकार की लायबिलिटी इन्शुरन्स प्रदान करती हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

एचडीएफसी एर्गो कमर्शियल जनरल लायबिलिटी - यह इन्शुरन्स पालिसी संपत्ति को होने वाले नुकसान और शारीरिक चोट के क्लेम के लिए पूरी सुरक्षा प्रदान करती है।

आईसीआईसीआई लोम्बार्ड - यह कई प्रकार के लायबिलिटी इन्शुरन्स कवर प्रदान करती है जो व्यापार की ज़रूरतों से मेल खाते हैं।

भारती अक्सा कमर्शियल जनरल लायबिलिटी पालिसी - यह प्लान मूल रूप से उन देनदारियों के लिए कवर प्रदान करता है जो व्यापार की प्रक्रियाओं और संचालन की वजह से पैदा होती हैं।

टाटा एआईजी - यह ऐसी कमर्शियल जनरल लायबिलिटी पालिसी प्रदान कीर्ति है जो थर्ड पार्टी लायबिलिटी को कवर करती है।

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