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मरीन इन्शुरन्स

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पुराने समय से ही वैश्विक व्यापार माल की आवाजाही के लिए समुद्री रास्तों पर बहुत ज़्यादा निर्भर रहा है। हवाई जहाज़ और रेलगाड़ी के आविष्कार से पहले समुद्री जहाज़ ही व्यापार के लिए यातायात का प्रमुख साधन हुआ करते थे। लेकिन पुराने ज़माने के समुद्री रास्ते बहुत खतरों से भरे होते थे जैसे खराब मौसम होना, समुद्री डाकूओं का आक्रमण हो जान या दूसरे जहाज़ से टक्कर हो जाना और ऐसे ही कई अन्य। इन सब जोखिमों के कारण मरीन इन्शुरन्स की ज़रूरत को बहुत बल मिला और मरीन इन्शुरन्स सबसे पहले विकसित हुई इन्शुरन्स कवरेज मानी जाती है। 

इन्शुरन्स की दूसरी अलग अलग किस्मों की तरह, मरीन इन्शुरन्स सुरक्षित डिलीवरी को पूरा कवर प्रदान करती है, लेकिन इसके साथ ही यह समुद्री जहाज़ द्वारा भेजे जा रहे सामान को भी कवरेज प्रदान करती है। मरीन इन्शुरन्स तीन प्रकार की होती है - शिपमेंट कवरेज, फ्रेट कवरेज और हल कवरेज - जो समुद्री जहाज़ों और नावों के लिए बनाई गई हैं और इन पर ले जाए जा रहे सामान को भी कवर करती हैं।

सभी समुद्री जहाज़ और यॉट मालिकों के लिए व्यापार के उद्देश्य से इन्हें इस्तेमाल करने के लिए मरीन इन्शुरन्स अनिवार्य है।

मरीन इन्शुरन्स की परिभाषा एक समझौते के रूप में दी जा सकती है जिसके अंतर्गत इन्शुरन्स कंपनी इन्शुरन्स किए गए सामान को कहीं ले जाए जाने के दौरान हो सकने वाले जोखिमों को कवरेज प्रदान करती है। इसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि यह मरीन इन्शुरन्स अनुबंध की शर्तों के हिसाब से समुद्री जहाज़ या नाव और उसमें ले जाए जा रहे सामान को रास्ते की सभी बाधाओं और जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करती है।

मरीन इन्शुरन्स क्यों महत्वपूर्ण है?

मरीन इन्शुरन्स हर उस व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है जिसमें उत्पादों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाए जाने की ज़रूरत होती है। यह कहने की बात नहीं है कि उत्पादों का भण्डार पूँजी का एक बड़ा हिस्सा होता है और जब यह आपके परिसर से बाहर निकलता है तो कई तरह के जोखिमों से इसका सामना होने की संभावना होती है। एक तय राशि का भुगतान करके या एक तय सीमा के अंदर खरीदी गई मरीन इन्शुरन्स आपके सामान को या आपके मालवाहक जहाज़ को रास्ते के कई जोखिमों की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं से सुरक्षा प्रदान करती है। 

आप अपने उत्पाद को देश के अंदर भेज रहे हों या देश की सीमाओं के बाहर, आप मरीन इन्शुरन्स से इसकी सुरक्षा चुन सकते हैं। इन्शुरन्स कंपनी आपके सामान को भजने की जगह से लेकर पहुँचने की जगह तक की सुरक्षा प्रदान करती है।

अपने व्यापार में मरीन इन्शुरन्स लगाते समय आपको क्या जानकारी होनी चाहिए?

अपने उत्पादों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए हर संगठन की एक विशेष प्रकार की आवश्यकता होती है, इसलिए मरीन इन्शुरन्स खरीदने से पहले आपको पता होना चाहिए कि अपने सामान की सुरक्षा के लिए आपको किस प्रकार की मरीन इन्शुरन्स चाहिए। आपको किस प्रकार की मरीन इन्शुरन्स चाहिए और किस स्तर की कवरेज चाहिए उसी से मरीन इन्शुरन्स की कीमत तय होगी। यह कीमत जिसे मरीन इन्शुरन्स प्रीमियम कहते हैं, आपके व्यापार पर होने वाले खर्चे का एक बहुत छोटा सा हिस्सा होती है। इस मरीन इन्शुरन्स प्रीमियम की राशि के बदले में आप अपने उत्पादों की समुद्र, वायु, थल या रेल से भेजे जाने के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। मरीन इन्शुरन्स विभिन्न पारगमन धाराओं के आधीन होती है जिनका ध्यान आपको पॉलिसी के दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करते समय रखना होता है।

मरीन इन्शुरन्स की व्यापकता क्या है?

मरीन इन्शुरन्स विभिन्न कारणों से होने वाले नुकसान/क्षति को कवर करती है, जैसे:

  • बिजली गिरना 
  • तूफ़ान 
  • आग या धमाका 
  • सामान ले जा रहे वाहन का पलटना 
  • पोत, हवाई जहाज़ या समुद्री जहाज़ का जलना या डूबना 
  • टक्कर होना 
  • किसी प्रकार की दुर्घटना 
  • पुलों का टूटना 
  • टक्कर (सिवाय पानी के साथ)
  • समुद्र के पानी से सामान का खराब होना 
  • पोत या जहाज़ का फंसना, डूबना या पलटना 
  • किसी भी बंदरगाह पर सामान का छूटना 
  • भूकंप या ज्वालामुखी फटना 
  • माल गिर जाना 
  • माल धुल जाना  

मरीन इन्शुरन्स पॉलिसी के अपवाद

अधिकतर मरीन इन्शुरन्स पॉलिसियों के सामान्य अपवादों की सूची नीचे दी गई है:

  • सामान्य घिसना या टूटना या सामान्य रिसाव 
  • भेजे गए उत्पादों की गलत पैकिंग 
  • इच्छापूर्वक या जानबूझ कर किया गया नुकसान 
  • सामाजिक हलचल, संघर्ष या दंगों आदि की वजह से हुआ नुकसान 
  • माल ले जा रहे पोत के मालिक की पैसे की गड़बड़ी या भुगतान ना करने की वजह से हुआ नुकसान

मरीन कवरेज प्लान देने वाली कारपोरेशन

भारत में विभिन्न बैंक और वित्तीय संस्थान हैं जो मरीन कवरेज प्रदान करते हैं। कुछ छोटी की कंपनियां है भारती अक्सा, आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, न्यू इंडिया असुरेन्स कंपनी लिमिटेड, यूनाइटेड इंडिया इन्शुरन्स कंपनी लिमिटेड, टाटा एआईजी, रॉयल सुंदरम, चोला इन्शुरन्स इत्यादि।

मरीन इन्शुरन्स क्लेम प्रक्रिया

मरीन इन्शुरन्स के क्लेम की प्रक्रिया करीब करीब दूसरी इन्शुरन्स की क्लेम प्रक्रिया की तरह ही है। मरीन कवरेज के क्लेम के लिए लिए जाने वाले कुछ मौलिक कदम निम्नलिखित हैं:

आपको क्लेम प्रतिनिधि या अपनी इन्शुरन्स कंपनी की नज़दीकी शाखा से संपर्क करना होगा और उन्हें क्लेम की सूचना देनी होगी।

अगर उत्पादों का नुकसान डिलीवरी की जगह या बंदरगाह पर हुआ है तो आपको एक संयुक्त डिलीवरी सर्वे का प्रबंध करना होगा।

पॉलिसी लेते समय जो रिपोर्ट और सर्टिफिकेट आपको दिए गए थे वे आपको प्रस्तुत करने होंगे। आपको अपने क्लेम की प्रमाणिकता सिद्ध करने के लिए प्रमाणिक इनवॉइस और कुछ अन्य दस्तावेज़ या फाइलें भी पेश करनी होंगी।

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