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नेशनल इन्शुरन्स पर्सनल एक्सीडेंट
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नेशनल इन्शुरन्स कंपनी काफी लम्बे समय से इन्शुरन्स के क्षेत्र में काम कर रही है। कोलकाता में वर्ष 1906 में कंपनी की शुरुवात हुई थी और तब से लेकर अब तक बाजार में अच्छे प्रोडक्ट्स और प्लान्स पब्लिक के लिए सफलतापूर्वक उपलब्ध करा रही है। इनकी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी को सबसे अच्छा माना जाता रहा है। पुरानी इन्शुरन्स कम्पनीज जो आज तक चल रही है उनमे नेशनल इन्शुरन्स कंपनी को सबसे बेस्ट माना जाता है। इनके पास इन्शुरन्स प्लान्स की एक लम्बी लिस्ट है जिसे जरूरत के अनुसार कस्टमाइज भी किया जा सकता है। पब्लिक सेक्टर की ये एकलौती कंपनी है जिसने कॉर्पोरेट और रूरल इन्शुरन्स प्लान दोनों के लिए कस्टमाइजेशन का ऑप्शन दिया। लाइफ में आने वाली हर तरह की परेशानी का सामना करने के लिए इनके पास कई तरह के प्लान्स हैं। अगर हम एक्सीडेंटल प्लांस की बात करें तो आपके पास इन्शुरन्स का होना बहुत जरूरी है क्योंकि हादसे कभी भी हो सकते हैं। ये ना केवल आपको एक्सीडेंट से जुड़े सभी खतरों से बचाता है बल्कि आपके परिवार को फाइनेंसियल स्टेबिलिटी भी देता है। किसी भी एक्सीडेंट में फाइनेंस एक इम्पोर्टेन्ट फैक्टर है क्योंकि आजकल ट्रीटमेंट काफी महंगा हो गया है। इन्शुरन्स पॉलिसी एक्सीडेंट होने पर आपके बहुत काम आती है और एक सपोर्ट सिस्टम का काम करती है।

नेशनल इन्शुरन्स: अचीवमेंट्स

2015 में, नेशनल इन्शुरन्स कंपनी ने फेमस दलाल स्ट्रीट इंवेस्टमेंट जर्नल अवार्ड जीता। कंपनी को रिज़र्व में सबसे ज्यादा ग्रोथ करने के लिए भी जाना जाता है। आज नेशनल इन्शुरन्स कंपनी सबसे रेप्यूटेड फर्मों में से एक है जो सोसाइटी के लिए बहुत अच्छा काम कर रही है।

नेशनल इन्शुरन्स पर्सनल एक्सीडेंट: ऑनलाइन फैसिलिटीज

बाजार में हर जगह इंटरनेट छाया हुआ है। हर छोटे और बड़े काम ऑनलाइन किये जा सकते हैं। सिर्फ एक क्लिक से मानों सारी दुनिया आपके पहुँच में हो। इन्शुरन्स पॉलिसी के लिए, कंपनियों ऑनलाइन फैसिलिटीस भी देती हैं। आप नेशनल इन्शुरन्स पर्सनल एक्सीडेंट पॉलिसी ऑनलाइन खरीद सकते हैं। आपको वेबसाइट पर जाकर डाक्यूमेंट्स अटैच करके ऑनलाइन बैंकिंग से अमाउंट पे करना होता है। ऑनलाइन पॉलिसी लेने पर आपको किसी भी मेडिकल चेकअप की जरूरत नहीं होती है, जबकि ब्रांच ऑफिस से पॉलिसी लेने पर आपको डाक्यूमेंट्स के साथ मेडिकल टेस्ट्स भी कराने होते हैं। आप कंपनी के टोल फ्री नंबर पर कॉल करके भी ऑनलाइन प्रोसीजर के बारे में इनफार्मेशन ले सकते हैं। ऑनलाइन फैसिलिटी का उपयोग करना काफी फायदेमंद है क्योंकि आप पॉलिसी का स्टेटस चेक कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर पॉलिसी कैंसिल भी कर सकते हैं। आपको बस एक अकाउंट बनाना होता है। घर बैठे ही आप अपनी पॉलिसी को रिन्यू कर सकते हैं, कैंसिल कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन क्लेम भी कर सकते हैं। इन्शुरन्स कंपनी आपको बेस्ट सर्विसेज प्रदान करती है और अमाउंट सीधे आपके बैंक खाते में जमा करने की फैसिलिटी भी देती है।

नेशनल इन्शुरन्स पर्सनल एक्सीडेंट प्लान्स

नेशनल इन्शुरन्स पर्सनल एक्सीडेंट प्लान एक्सीडेंट होने के बाद सुरक्षित रहने में आपकी मदद करता है क्योंकि सभी मेडिकल ट्रीटमेंट और एक्सीडेंट में इन्शुरन्स होल्डर की डेथ होने पर होने वाले खर्चे कंपनी उठाती है। एक्सीडेंटल डेथ के केस में व्यक्ति के परिवार को लमसम अमाउंट दिया जाता है और फ्यूनरल एक्सपेंस भी कंपनी उठाती है। प्लान्स में निम्नलिखित कवरेज दिया जाता है:-

एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट

यदि एक्सीडेंट होने के बाद और उसकी वजह से इन्शुरन्स होल्डर की डेथ 12 महीने की अंदर हो जाती है तो पॉलिसी में बताया गया अमाउंट नॉमिनी को दे दिया जाता है। अगर डेथ कमर्शियल शिप या प्लेन में ट्रेवल करते हुए हो जाये तो कंपनी इन्शुरन्स अमाउंट का दोगुना इन्शुरन्स होल्डर की फॅमिली को देती है।

परमानेंट टोटल डिसेबिलिटी प्लान

यदि एक्सीडेंट की वजह से परमानेंट टोटल डिसेबिलिटी हो जाये और व्यक्ति किसी भी तरह का काम या बिज़नेस ना कर सकता हो तो कंपनी इन्शुरन्स होल्डर और उसकी फॅमिली को गुजारे के लिए फिक्स अमाउंट देती है।

परमानेंट पार्शियल डिसेबिलिटी

एक्सीडेंट की वजह से पार्शियल डिसेबिलिटी भी हो सकती है। एक्सीडेंट की तारीख से 12 महीने के अंदर और एक्सीडेंट की वजह से अगर व्यक्ति शरीर ना हिला सके, उसकी एक आँख की रौशनी चली जाये, एक हाथ या पैर का मूवमेंट पूरी तरह से बंद हो जाये, तो कंपनी इन्शुरन्स अमाउंट का 50% देती है।

टेम्पररी टोटल डिसबिलिटी प्लान

टेम्पररी टोटल डिसबिलिटी होने पर कंपनी पॉलिसी में बताये गए अमाउंट का 1% की दर से वीकली पेमेंट करती है। हालांकि, ये 5000 रुपये प्रति सप्ताह से अधिक नहीं होना चाहिए। पेमेंट इस तरह किया जाता है की अगर पूरे अमाउंट को जोड़ें तो ये इन्शुरन्स अमाउंट, जो की पॉलिसी लेते समय तय की गयी थी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। पेमेंट सिर्फ 104 सप्ताह तक ही दिया जाता है।

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