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एलआईसी कैंसर कवर
  • 100+ शीर्ष इन्शुरन्स प्लान
  • 5 लाख रुपये का कवरेज @ ₹16/प्रतिदिन*
  • तुरंत पॉलिसी खरीदें

#Virukipolicy | T&C*

भारतीय जीवन बीमा निगम ने हाल ही में एलआईसी कैंसर कवर प्लान की शुरुवात की है। यह एक रोग विशेष हेल्थ इन्वेस्टमेंट प्लान  है जो एक निश्चित राशि के प्रीमियम और लाभ के साथ एक पारंपरिक मेडिकल इन्शुरन्स प्लान की तरह काम करता है|अगर इन्शुरन्स प्लान की अवधि के दौरान बीमित व्यक्ति में कैंसर के किसी भी चरण का पता लगता है ऐसे समय में इन्शुरन्स कंपनी उपचार का खर्च पूरा खर्च उठती है चाहे वह कितना भी अधिक क्यों न हो।

एलआईसी कैंसर प्लान एलिजिबिलिटी

इस प्लान को लेने के लिए नीचे लिखी शर्ते पूरी होना आवश्यक है:

  • पॉलिसी में प्रवेश करने वाले व्यक्ति की आयु 20 वर्ष से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • पॉलिसी की अवधि न्यूनतम 10 वर्ष और अधिकतम 30 वर्ष हो सकती है।
  • पॉलिसी की कवरेज जारी रखने की न्यूनतम आयु 50 वर्ष और अधिकतम 75 वर्ष है।
  • इन्शुरन्स समएश्योर्ड या मूल राशि की न्यूनतम सीमा 10 लाख और अधिकतम सीमा 50 लाख है।

एलआईसी का कैंसर कवर इन्शुरन्स प्लान

एलआईसी का यह कैंसर इन्शुरन्स प्लान दो प्रमुख प्रकार की योजनाओं को चुनने का ऑप्शन देता है जो ग्राहक द्वारा प्लान खरीदते समय चुना जा सकता है।

1) लेवल समइंश्योर्ड प्लान - इस प्लान में इन्शुरन्स की जाने वाली राशि प्लान की पूरी अवधि के दौरान समान रहती है। ग्राहक यदि चाहे तो भी इसे  बदलने  का  ऑप्शन  उपलब्ध  नहीं है |

2) इन्शुरन्स अमाउंट बढ़ाना - यह प्लान ग्राहक को हर  साल समइंश्योर्ड इन्शुरन्स अमाउंट में  10% वृद्धि की अनुमति देता है लेकिन केवल पॉलिसी के पहले 5 वर्षों तक। यदि पॉलिसी के पहले पांच वर्षों के भीतर बीमित व्यक्ति की में कैंसर के लक्षण मिलते हैं तो इन्शुरन्स अमाउंट में कोई भी वृद्धि नहीं होगी। इस प्रकार, बीमित व्यक्ति को मिलने वाले लाभों की गणना उस इन्सुरेंस अमाउंट से की जाएगी के बराबर हो सकती है

पॉलिसी लेने के समय तय इन्शुरन्स अमाउंट या समइंश्योर्ड अथवा,

पहले वर्ष के दौरान लागू और बाद में बढ़ा हुआ बेसिक समइंश्योर्ड।

हालांकि, यह याद रखना चाहिए कि एलआईसी कैंसर कवर एक बीमारी पर केंद्रित या डिजीज सेंट्रिक इन्शुरन्स प्लान है, इसलिए पॉलिसी सरेंडर करने, पॉलिसी के खिलाफ ऋण या इसके मैच्योर होने पर लाभ की कोई सुविधा नहीं है|

एलआईसी कैंसर प्लान बेनिफिट्स

एलआईसी के इस कैंसर कवरेज प्लान के लाभ को दो समूहों में बांटा गया है:

1. अर्ली या प्रारंभिक कैंसर स्टेज:

  • बड़ी राशि का लाभ - इन्शुरन्स अमाउंट का 25% पॉलिसीधारक को प्राप्त होता है।
  • प्रीमियम में छूट - पॉलिसी की वर्षगांठ या बीमारी के पता चलने की तारीख से अगले लगातार 3 वर्ष या पॉलिसी की शेष बची अवधि, जो भी कम हो, उसमे प्रीमियम की छूट दी जाती है। तीन साल के लिए छूट प्राप्त करने के बाद पॉलिसीधारक को सामान्य प्रीमियम का भुगतान करने की आवश्यकता होती है।
  • यह ध्यान देने योग्य है कि कैंसर के प्रारंभिक या अर्ली स्टेज में प्राप्त लाभ केवल एक बार के लिए ही लागू होता है। बीमाधारक इस पॉलिसी से कैंसर के एक और प्रारंभिक स्टेज के लिए कोई और दावा नहीं कर सकता है।

2. एडवांस्ड कैंसर स्टेज:

  • बड़ी राशि का लाभ - यदि पॉलिसीधारक को पहले कैंसर स्टेज में कोई राशि नहीं मिली थी तो इन्शुरन्स अमाउंट की पूरी राशि मिलती है|
  • कमाई का लाभ - बड़ी राशि के लाभ के साथ, कुल इन्शुरन्स अमाउंट का 1% पॉलिसीधारक को अगले 10 वर्षों की अवधि के लिए प्रत्येक महीने में प्राप्त होता है। पॉलिसीधारक के निधन के बाद भी, यह विशेष राशि बीमाधारक के द्वारा नामांकित व्यक्ति या नॉमिनी को प्रदान की जाती है।
  • प्रीमियम की छूट - पॉलिसी की आगामी वर्षगांठ अन्य सभी प्रीमियम पर छूट दी जाती है। बाद में, पॉलिसी में बीमित व्यक्ति को ऊपर लिखित लाभ को छोड़कर कोई भी अन्य भुगतान नहीं किया जाता।
  • यह याद रखना चाहिए कि एक बार एडवांस कैंसर स्टेज क्लेम प्राप्त होने के बाद अन्य दावे स्वीकार्य नहीं होंगे, भले ही यह प्रारंभिक कैंसर स्टेज के लिए हो। इसके अलावा, यदि पॉलिसीधारक को एक ही समय में कैंसर के 2 अलग स्टेजेस या 2 अलग-अलग कैंसर के लक्षण पाए जाते हैं, तो केवल अधिकतम खर्च वाले क्लेम को ही स्वीकार्य किया जाएगा।

एलआईसी कैंसर कवरेज पॉलिसी की विशेषता

कैंसर के प्रारंभिक चरण - कैंसर विशेषज्ञ द्वारा सत्यापन के अलावा हिस्टोलॉजिकल वेरिफिकेशन द्वारा निम्नलिखित स्थितियों की पहचान साबित करना आवश्यक है -

  • कार्सिनोमा-इन-सीटू - इसका अर्थ है कैंसर का उन्ही कोशिकाओं के समूह में लगातार बढ़ना जहां वे उत्पन्न हुई थीं। इसमें एपिथेलिम की पूरी चौड़ाई को शामिल किया गया है हालाँकि यह आधार झिल्ली को पार नहीं करना चाहिए या आसपास के अंगों और ऊतकों पर नहीं फैला होना चहिये। इसकी जाँच माइक्रोस्कोपिक और एक फिक्स्ड टिश्यू के साथ होनी चाहिए।
  • प्रोस्टेट कैंसर का प्रारंभिक चरण - इस मामले में, 2 से 6 के बीच ग्लिसन पॉइन्ट के साथ टीएनएम को लागू करने वाला हिस्टोलॉजिकल विवरण ही मान्य होता है।
  • थायराइड कैंसर का प्रारंभिक चरण - टीजीएम का उपयोग कर टी1नोमो के रूप में 2.0 सेमी से कम थायराइड कैंसर का हिस्टोलॉजिकल वर्गीकरण मान्य होता है।
  • मूत्राशय (ब्लैडर) के कैंसर का प्रारंभिक चरण - मूत्राशय में किसी भी ट्यूमर जैसे टीएनएमओ का वर्गीकरण टीएनएम के उपयोग द्वारा मान्य होता है।
  • क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया का प्रारंभिक चरण - राय स्टेजिंग का उपयोग करके 0-2 के बीच इस प्रारंभिक स्टेज ल्यूकेमिया का वर्गीकरण स्वीकार्य है।
  • सर्वाइकल डिसप्लेसिया - कोन बायोस्कोपी में सर्वाइकल इंट्रापेथेलियल नियोप्लासिया 3 की तरह पहचाने जाने वाले एक्यूट सर्वाइकल डिसप्लेसिया स्वीकार्य है।

एडवांस स्टेज कैंसर - कैंसर के एडवांस स्टेज में घातक ट्यूमर की बेकाबू वृद्धि होती है और बढ़ती घातक कोशिकाये सामान्य टिश्यू को भी नुकसान पहुंचाती है। हिस्टोलॉजिकल क्लासिफिकेशन के साथ कैंसर कोशिकाओं की विकृति की जाँच की जानी चाहिए। 'कैंसर' शब्द ल्यूकेमिया, लिम्फोमा या सारकोमा की ओर इशारा करता है।

एलआईसी के कैंसर कवर इन्शुरन्स प्लान के लिए वेटिंग टाइम

यह पॉलिसी के इश्यू डेट या रिस्क कवरेज की रिवाइवल डेट इनमे से जो भी बाद में आता है, से लेकर 180 दिनों के वेटिंग टाइम के साथ आता है।

एलआईसी के कैंसर कवरेज प्लान के अन्य लाभ

एलआईसी कैंसर कवर प्लान में  धारा 80 डी के  तहत इनकम टैक्स बेनिफिट का लाभ लिया जा सकता है|  इस प्लान में भरे गए प्रीमियम पर प्रत्येक वर्ष अधिकतम 55 हजार तक की रकम में इनकम टैक्स लाभ लेने की अनुमति है।